उत्तर प्रदेश में विधानसभा मतदाता सूची का पंचायत और नगर निकाय सूचियों से मिलान कराया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत सूची और विधानसभा सूची के ग्रामीण मतदाताओं की गिनती में करीब 2.4 करोड़ का अंतर मिलने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलों को निर्देश दिए हैं।
इस अभ्यास का उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान करना है जिनका नाम विधानसभा सूची में दर्ज नहीं है। पंचायत और विधानसभा की सूचियां अलग निर्वाचन प्राधिकरण तैयार करते हैं।
सूचियों का अंतर अकेले किसी व्यक्ति को फर्जी या अपात्र मतदाता साबित नहीं करता। नाम मिलान और पात्रता जांच के बाद ही निष्कर्ष निकलेगा।
नई दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय की 2016 की फाइल फोटो; मतदाता सूची मिलान की मौजूदा कार्यवाही नहीं।




