आर्द्रभूमि और अभयारण्य की सुरक्षा
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आगामी रेणुका जी मेले में वाणिज्यिक गतिविधियों, ध्वनि और कचरा प्रबंधन के लिए निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जी एस संधावालिया तथा न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की पीठ ने संबंधित याचिकाओं की सुनवाई में झील और वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण पर जोर दिया।
100 मीटर के दायरे में क्या प्रतिबंध
रेणुका जी झील, परशुराम ताल और पवित्र परिक्रमा मार्ग के 100 मीटर बफर में व्यावसायिक दुकानें या तंबू लगाने की अनुमति नहीं होगी। अभयारण्य के भीतर लाउडस्पीकर और तेज ध्वनि प्रणाली पर रोक रहेगी। सांस्कृतिक मंच तथा कार्यक्रम अभयारण्य सीमा के बाहर रखने को कहा गया है।
शौचालय, प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरा
प्रशासन को कम से कम 100 अस्थायी शौचालय तथा अतिरिक्त सफाईकर्मी उपलब्ध कराने हैं। प्रवेश बिंदुओं पर संयुक्त उड़नदस्ता प्लास्टिक की निगरानी करेगा। विक्रेता अपनी गतिविधि से निकलने वाले पैकेजिंग कचरे को जमा करके हटाने के जिम्मेदार होंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रतिदिन शोर स्तर की निगरानी करेगा।
निरीक्षण और अगली सुनवाई
न्यायमित्र, वन्यजीव विभाग, प्रदूषण बोर्ड और उपायुक्त के प्रतिनिधियों की समिति मेले से पहले तथा बाद में निरीक्षण करेगी। अवैध ढांचों पर कार्रवाई विधिक प्रक्रिया से करने का निर्देश है। अनुपालन की अगली समीक्षा 15 दिसंबर के लिए निर्धारित बताई गई है।
हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील की फाइल फोटो; यह मौजूदा मेले का दृश्य नहीं है।




