दो वर्ष से लंबित मामले पर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के अंतर्गत लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने में फैसला करने को कहा है। फ्री प्रेस जर्नल की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार निर्देश बुधवार को दिए गए।
याचिका में क्या आरोप है
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जुलाई 2024 में याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप है कि 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली सप्रे ने बाद में स्वेच्छा से कांग्रेस की सदस्यता छोड़कर भाजपा से जुड़ने जैसा आचरण किया। यह आरोप निर्णय के लिए विधानसभा अध्यक्ष के सामने है।
सिंघार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि विधायक विरोधी पक्ष के साथ प्रचार कर रही थीं, फिर भी कार्यवाही शुरू नहीं हुई। उन्होंने मामले के समयबद्ध निपटारे की मांग की।
अदालत ने देरी पर ध्यान दिया
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ ने संविधान की दसवीं अनुसूची से संबंधित याचिकाओं के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने पहले समयसीमा तय करने की मांग स्वीकार नहीं की थी।
शीर्ष अदालत का ताजा निर्देश निर्णय लेने की समयसीमा से जुड़ा है। उसने इस आदेश से सप्रे को स्वयं अयोग्य घोषित नहीं किया है। पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है।
मध्य प्रदेश विधानसभा भवन की फाइल फोटो।




