महिलाओं और बच्चों के मामलों पर फोकस
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की योजना 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं तथा बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लंबित मामलों की सुनवाई तेज करने में सहायता मिलेगी।
850 अदालतों की व्यवस्था क्या है
ANI आधारित रिपोर्ट के मुताबिक स्वीकृत योजना में देशभर में 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों का सुदृढ़ीकरण और विस्तार शामिल है। इनमें बाल यौन अपराध संरक्षण कानून यानी POCSO के मामलों की विशेष अदालतें भी आती हैं। योजना 29 भागीदार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की जानी है।
मौजूदा अदालतें और आगे विस्तार
रिपोर्ट में वर्तमान संख्या 779 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें बताई गई है, जिनमें 399 विशेष POCSO अदालतें हैं। बलात्कार तथा POCSO मामलों की लंबित संख्या के आधार पर अतिरिक्त जिलों तक विस्तार किया जाना है। इसलिए 850 अदालतों की मंजूरी को उतनी नई अदालतें तत्काल खुल जाने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
सरकार का उद्देश्य और आगे की जरूरत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्णय की जानकारी देते हुए त्वरित न्याय और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर जोर दिया। योजना की अवधि बढ़ने के बाद वास्तविक असर अदालतों की उपलब्धता, लंबित मामलों की सुनवाई और राज्यों में क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा।
ग्वालियर के जिला अदालत भवन की फाइल फोटो; यह योजना के तहत किसी नई अदालत का दृश्य नहीं है।




