आयात निर्भरता घटाने के लिए मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजी सहायता योजना मंजूर की है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की पांच वर्षीय अवधि में लिथियम और निकल के उच्च शुद्धता वाले यौगिक तैयार करने की क्षमता विकसित करना लक्ष्य है।
किन संयंत्रों को सहायता मिलेगी
पात्र निवेश का 30 प्रतिशत पूंजी अनुदान चार संयंत्रों के लिए प्रस्तावित है। दो लिथियम प्रसंस्करण संयंत्रों की न्यूनतम क्षमता 30-30 हजार टन और दो निकल संयंत्रों की 50-50 हजार टन होगी। प्रति लिथियम लाभार्थी अधिकतम 500 करोड़ तथा प्रति निकल लाभार्थी 900 करोड़ रुपये की सीमा है।
चयन और भुगतान की प्रक्रिया
पहले तकनीकी पात्रता की जांच होगी। पात्र आवेदक वित्तीय बोली के दूसरे चरण में भाग ले सकेंगे। हर खनिज के लिए सबसे कम पूंजी सहायता मांगने वाले दो लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। भुगतान तय पड़ाव पूरे करने से जुड़ी तीन किस्तों में होगा।
बैटरी और उद्योगों से संबंध
लिथियम तथा निकल इलेक्ट्रिक परिवहन, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। निकल उत्पादन में कोबाल्ट सह-उत्पाद के रूप में मिल सकता है। योजना की मंजूरी का अर्थ चारों संयंत्र अभी चालू होना नहीं है; आगे चयन और निर्माण के चरण बाकी हैं।
संग्रहालय में प्रदर्शित लिथियम अयस्क की सांकेतिक फाइल फोटो।




